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वाराणसी : बरियासनपुर गांव की बेटी व बहुओं ने पुरूष सोच को दिखाया आईना

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विजय श्रीवास्तव
-संतोरा देवी के 22 जुलाई को निधन के बाद बेटी व बहुओं ने दिया था कंधा
-बुधवार को दसंवा को आयोजित सभा कर किया 95 वृक्षों को रोपण
वाराणसी। लोग कहते हैं कि परिवर्तन की बयार शहरों से ही निकलती है। गांव अपने दकियानुसी विचारों व परंपराओं में ही उलझे रहते हैं। साथ ही समाज में परिवर्तन का जिम्मा भी पुरूषों के कंधे पर रहता है। महिलाए तो बस उनका अनुसरण ही कर सकती हैं लेकिन समाज में पुरुषवादी इस सोच को आईना दिखाने का काम बरियासनपुर गांव की बेटी व बहुओं ने कर दिखाया है। जिसने जहां पुरूषों के बर्चस्व को तोडते हुए अपनी माॅ के निधन के बाद जहां कंधा दिया वहीं तेहरी जैसे खर्चीले भोज को भी बाय-बाय करते हुए दसवां के दिन ही गांव में 95 वृक्ष का रोपण कर एक नया इतिहास रच दिया।

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गौरतलब है कि वाराणसी के चिरईगांव ब्लाक के गांव बरियासनपुर में 22 जुलाई 2018 को 95 वर्षीय संतोरा देवी का निधन हो गया। उनके बेटे सहित बेटियां भी है लेकिन उस दिन संतोरा देवी का शव को बेटी – बहुओं ने कंधा दिया था। वहीं काफी दूर तक शव यात्रा में भी शरीक भी हुई। बुधवार को संतोरा देवी का 10 वां था। इस दौरान बेटी व बहुओं ने पहले ही निर्णय कर लिया था कि वे तेरही जैसे फिजूलखर्ची रश्म को नहीं करेंगे। वरन् दसंवा के दि नही गांव में शोक सभा के साथ 95 वृक्षों का रोपण गांव में करेंगी। बुधवार को संतोरा देवी के दसवां के अवसर पर गांव में आयोजित उनकी शोक सभा में उनके चित्र पर पुष्प अर्पित किया। इसके बाद उनके 95 वर्ष के जीवन काल को यादगार और अनुकरणीय बनाने हेतु संकल्प के रूप में 95 पौधे लगाकर यह संदेश दिया कि यह एक सकारात्मक पहल है।
मृत संतोरा देवी की बेटी पुष्पावती बहू प्रभावती , कलावती ,और अमरावती संग कई महिलाओं ने समाज में महिलाओं की बराबरी का हक और कुरितियों के खिलाफ कदम बढ़ाने के इस प्रयास को पूरे क्षेत्र में सराहा जा रहा है। मृत्यु के उपरांत संतोरा का नेत्रदान और शोक सभा कर पौधरोपण कर मिशाल पेश की है। नाते रिश्तेदारों सगे सम्बंधियों जागरूक नागरिकों ने इस प्रयास को सफल बनाने में साथ दिया। रिश्तेदारों ने तो शोक सभा में शिरकत दो -दो पौधे के साथ किया

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कुरीतियों पर आघात के साथ एक नई शुरुआत

इस दोैरान आयोजित सभा में लोंगो ने जहां इस बदलाव को सराहा वहीं अपने-अपने विचार भी व्यक्त किया। वक्ताओं ने कहा कि समाज में प्रचलित कुछ प्रथाएं समय के अनुसार बदलनी चाहिए।कुरीतियों पर अंकुश लगे। इसके साथ समाज में एक सकारात्मक सोच का माहौल बने। उसे जमीनी तौर पर उतारा जाये।इसी संकल्प के साथ बरियासनपुर में संतोरा देवी की शोक सभा में उपस्थित वक्ताओं ने अपना विचार रखा। परिवार में बेटी और बहूओं का मान बेटे बाबूलाल, त्रिभुवन पटेल ने भी रखा।मरने पर नेत्रदान और संस्कार भोज की जगह शोक सभा व पौधरोपण कार्यक्रम को सहृदय स्वीकार किया।संतोरा के पति स्व अयोध्या प्रसाद पटेल भी समाज में व्याप्त फिजूलखर्ची के मुखर विरोधी थे।शोक सभा में छोटे लाल महेन्द्र मौर्य ग्रामप्रधान देवराज पटेल राजेन्द्र मानव पूर्व प्रधान बालकिशुन पटेल झगड़ू भईया अतुल सिंह आरती संजू अनीता मीरा सुनीता आराधना सहित काफी संख्या में महिलाएं व पुरुष शामिल हुए।शोक सभा का संचालन आनंद शर्मा और आये हुए लोगों का आभार त्रिभुवन पटेल ने व्यक्त किया।

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