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वाराणसी : विश्व शांति के आह्वान के साथ चार दिवसीय कार्यक्रम प्रारम्भ

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-मूलगंध कुटी विहार के 86वें वार्शिकोत्सव के अवसर पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित
-कठिन चीवन पूजा व महा परित्राण पाठ के साथ चार दिवसीय कार्यक्रम का प्रारम्भ
-पूरे सारनाथ को पंचशील झण्डों, फूल-मालाओं व विद्युत झालरों से सजाया गया
वाराणसी। महाबोधि सोसायटी आफ इण्डिया के 126 वर्श तथा मूलगंध कुटी विहार के 86वें वर्शगाठ पर आज चार दिवसीय कार्यक्रम का प्रारम्भ भगवान बुद्ध के विधिवत पूजन के साथ प्रारम्भ हुआ। इस दौरान आपरह्न 3 बजे धमेख स्तूप पर विश्व शांति के लिए महाबोधि सोसाइटी आॅफ इण्डिया के संयुक्त सचिव व मूलगंध कुटी विहार के विहाराधिपति भन्ते के. मेधंकर थेरो के नेतृत्व में सैकड़ों बौद्ध भिक्षुओं ने प्रार्थना कर स्तूप के चारों ओर दीप प्रज्जवलित किया। इस दौरान पूरे सारनाथ व मूलगंध कुटी विहार को पंचशील झण्डों, फूल-मालाओं व विद्युत झालरों से सजाया गया। चार दिवसीय कार्यक्रम में शामिल होने के लिए दर्जन भर देशों से बौद्ध अनुयायिओं का जमवड़ा शुरु हो गया है।

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ज्ञातव्य है कि महोबोधि सोसायटी संस्था को जहां 126 वर्श पूरे हुए हैं वहीं मूलगंध कुटी विहार के 86 वर्श पूरे हुए हैं। जिसके उपलक्ष्य में पूरे सारनाथ को पंचशील झंडों से सजाया गया है। चार दिवसीय कार्यक्रम के पहले दिन आज सुबह 6.30 बजे भगवान बु़द्ध की विधिवत पूजा के साथ प्रारम्भ हुई। सायं महाबोधि सोसाइटी आॅफ इण्डिया के संयुक्त सचिव व मूलगंध कुटी विहार के विहाराधिपति भन्ते के. मेधंकर थेरो के नेतृत्व में सैकड़ों बौद्ध भिक्षु हाथ में कैण्डिल लेम्प लेकर मूलगंध कुटी विहार की परिक्रमा करते हुए बोधि वृक्ष के समीप स्थित 28 बुद्धों की पूजा के साथ दीप प्रज्जवलित किया गया। इस दौरान बोधि वृक्ष के समीप अन्य बौद्ध अनुयायियों ने भी दीप जलाया। शाम को ही मूलगंध कुटी विहार स्थित बुद्ध मन्दिर में विश्व शान्ति निमित्त भगवान बुद्ध की पुनः विधिवत पूजा की गयी। इस दौरान श्रीलंका, जापान, थाईलैण्ड आदि देशों के सैकड़ो बौद्ध अनुयायी उपस्थित रहे। पूरा परिसर बुद्धम् शरणम् गच्छामि, संघम् शरणम् गच्छामि, धम्मं् शरणम् गच्छामि की गूंज से पूरा वातावरण गुंजायमान हो उठा।  इस दौरान जापान, थाईलैण्ड, वियतनाम, श्रीलंका, कोरिया, म्यामार आदि देशों के बौद्ध अनुयायी उपस्थित रहे। तत्पश्चात रात्रि 8.00 बजे से रात्रि 11 बजे तक बौद्ध भिक्षुओं ने महापरित्राण का पाठ किया। इस अवसर पर श्रीलंका व वियतनाम के बौद्ध अनुयायी उपस्थित रहें।

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