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विद्युत निजीकरण की प्रक्रिया निरस्त कर खाली पदों पर अबिलम्ब भर्ती की मांग, धरने का सातवें दिन भी डटे रहे कर्मचारी

फाइल फोटो
विजय श्रीवास्तव
-बिजलिकर्मियो ने मुख्यमंत्री जी से प्रभावी हस्तक्षेप की मांग की
-वक्ताओं ने कहा कि निजीकरण गरीब जनता को बिजली से करेगी दूर

वाराणसी। विधुत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले प्रबन्ध निदेशक कार्यालय भिखारीपुर पर निजीकरण के खिलाफ आज सातवें दिन भी वाराणसी के समस्त बिजली कर्मचारियों एवं अभियंताओं ने विरोध प्रदर्शन जारी रखा। इस दौरान प्रदेश सरकार से मांग की कि विद्युत निजीकरण की प्रक्रिया को तत्काल निरस्त कर खाली पदों पर अबिलम्ब भर्ती की जाए जिससे आम जनता को सुचारू रूप से बिजली होती रहे।
विरोध सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओ ने बताया कि सरकार खुलेआम एक बिल के माध्यम से स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी उपभोक्ता को लागत मूल्य से कम रेट पर बिजली नही दी जाएगी और आज के समय मे बिजली की लागत मूल्य 7रुपया 80 पैसा है और बिजली एक्ट में किसी भी कम्पनी को 16 प्रतिशत लाभ कमाने का अधिकार प्राप्त है इससे स्पष्ट है कि उपभोक्ताओं की बिजली 10 रुपया प्रति यूनिट से कम नही होगी जो गरीब जनता किसी कीमत पर इतनी महंगी बिजली नही खरीद सकता इसलिए यह कहना गलत नही होगा कि बिजली केवल अमीर लोगो तक ही सीमित रह जायेगी और गरीबो से दूर हो जाएगी। ’प्रदेश में मीटर रीडिंग का काम निजी कंपनियों को दिया गया है। इसका अनुभव बेहद खराब है। ऐसी ही दिक्कत बिजली आपूर्ति में आ सकती है। यह फैसला पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से किया गया है।’
वक्ताओ ने कहा कि हमारे मुख्यमंत्री जी को अब प्रभावी हस्तक्षेप कर आज के परिवेश में बिजली की व्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए पावर कारपोरेशन में रिक्त पड़े लगभग 2 लाख पदों पर अबिलम्ब भर्ती कर देश के पढ़े-लिखे बच्चे जो बेरोजगार घूम रहे है उनको तत्काल रोजगार देने का कार्य हमारी द्वारा चुनी गई सरकार को करना चाहिए।
सभा को सर्वश्री ई0 चंद्रेशखर चैरसिया, आर0के0 वाही, मायाशंकर तिवारी,डॉ0आर0बी0 सिंह,ए0के0 श्रीवास्तव,राजेन्द्र सिंह,ई0 संजय भारती, जिउतलाल, हेमंत श्रीवास्तव,रमन श्रीवास्तव, संतोष कुमार, जगदीश पटेल, अंकुर पाण्डेय,वीरेंद्र सिंह, आदि पदाधिकारियो ने संबोधित किया।

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