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संकष्टी (बहुला) श्रीगणेश चतुर्थी व्रत से पुत्र की रक्षा के साथ ऐश्वर्य बढ़ता है: पं. प्रसाद दीक्षित

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-बुधवार 29 अगस्त को संकष्टी व्रत
-2 सितम्बर को श्री कृष्ण जन्माष्टमी, कजरी (रतजग्गा) 28 अगस्त को
-पंचांग: सोमवार 27 अगस्त से रविवार 02 सितंबर 2018 तक
वाराणसी। भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी बहुला चतुर्थी कहलाती है। इस व्रत को पुत्रवती स्त्रियां पुत्रों की रक्षा के लिए करती हैं। वस्तुतः यह गो पूजा का पर्व है। सत्य वचन की मर्यादा का पर्व है। माता की भांति अपना दूध पिलाकर गाय मनुष्य की रक्षा करती है। उसी कृतज्ञता के भाव से बहुला चतुर्थी को बहुला चतुर्थी व्रत को सभी को करना चाहिए। यह व्रत संतान सुख का दाता तथा ऐश्वर्य को बढ़ाने वाला है।

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आज के दिन गाय के दूध से बनी हुई कोई भी सामग्री नहीं खानी चाहिए और गाय की दूध पर उसके बछड़े का अधिकार समझना चाहिए। इस दिन दिनभर व्रत करके संध्या के समय गौ की पूजा की जाती है। कुलड़ पर पपड़ी आदि रखकर भोग लगाया जाता है और पूजन के बाद उसी का भोजन किया जाता है। पूजन के बाद व्रत की कथा सुनी जाती है जो इस प्रकार है –
द्वापर युग में जब भगवान श्रीविष्णु ने श्रीकृष्ण रूप में अवतार लेकर ब्रज में लीला की तो अनेक देवता भी अपने-अपने अपने अंशों से उनकी गोपालरूपी परिकर बने स गोशिरोमणि कामधेनु भी अपने वंश से उत्पन्न हो बहुला नाम से नंद बाबा की गौशाला में गाय बनकर उसकी शोभा बढ़ाने लगी स श्रीकृष्ण का उससे और उसका श्रीकृष्ण से सहज स्नेह था। बालकृष्ण को देखते ही बहुला के स्तनों से दूधधारा फूट पड़ती और श्री कृष्ण उसकी मातृभाव को देख उसके स्तनों में कमल पंखुड़ियों सदृश्य अपने होठों को लगा लगाकर अमृतसदृश्य पान करते। एकबार बहुला वन में हरी हरी घास चर रही थी। श्रीकृष्ण को लीला सूजी, उन्होंने माया से सिंह का रूप धारण कर लिया है।

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भयभीत बहुला थर थर कांपने लगी। उसने दीनवाणी में सिंह से कहा कि वनराज मैंने अभी अपने बछड़े को दूध नहीं पिलाया है, वह मेरी प्रतीक्षा कर रहा होगा। अतः मुझे जाने दो, मैं दूध पिला कर तुम्हारे पास आ जाऊंगी तब मुझे खा लेना। सिंह ने कहा मृत्यु में फंसे जीव को छोड़ देने पर उसके पुनः वापस लौट कर आने का क्या विश्वास ! निरुपाय हो बहुला ने जब सत्य और धर्म की शपथ ली, तब सिंह ने उसे छोड़ दिया। बहुला ने गौशाला में जाकर प्रतीक्षारत बछड़े को दूध पिलाया और अपने सत्य धर्म की रक्षा के लिए सिंह के पास वापस लौट आई। उसे देखकर सिंह बने श्रीकृष्ण प्रकट हो गए और बोले बहुले तेरी परीक्षा थी, तू अपने सत्यधर्म पर दृढ़ थी। अतः इसके प्रभाव से घर-घर तेरी पूजन होगी और तू गौमाता के नाम से पुकारी जाएगी। बहुला अपने घर लौट आई और अपने बछड़े के साथ आनंद से रहने लगी। इसका उद्देश्य है कि हमें सत्य प्रतिज्ञ होना चाहिए स उपर्युक्त कथा में सत्य की महिमा कही गई है। इस व्रत का पालन करने वालों को सत्य धर्म का अवश्य पालन करना चाहिए। साथ ही अनाथ की रक्षा करने से सभी मनोरथ पूर्ण हो जाते हैं। इस व्रत कथा की यह महनीय शिक्षा है।
प्ंचांग:-
अगस्त 2018, भाद्रपद मास कृष्ण पक्ष 1940
विक्रम संवत 2075
सोमवार 27 अगस्त- भाद्रपद मास कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि शाम 5.50 तक, अशून्य शयन व्रत, भाद्रपद मास प्रारंभ
मंगलवार 28 अगस्त- भाद्रपद मास कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि रात्रि 6.55 तक, कजरी (रतजग्गा)
बुधवार 29 अगस्त- भाद्रपद मास कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि रात्रि 7.36 तक, संकष्टी बहुला श्रीगणेश चतुर्थी, गो पूजा 3, भद्रा दिन में 7.16 से रात्रि 7.36 तक, हरितालिका पूजा, विशालाक्षी यात्रा
गुरुवार 30 अगस्त- भाद्रपद मास कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि रात्रि 7.42 तक, बहुला चतुर्थी (मध्य प्रदेश)
शुक्रवार 31 अगस्त- भाद्रपद मास कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि रात्रि 7.19 तक, रक्षा पंचमी (उड़ीसा), श्री माधव देव तिथि (असम), श्री चंद्रषष्ठी व्रत (चं. उ. रात्रि 9रू30)
शनिवार 01 सितंबर – भाद्रपद मास कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि रात्रि 6.26 तक, हलषष्ठी व्रत (ललही), भद्रा रात्रि 6.26 से प्रारंभ
रविवार 02 सितंबर – भाद्रपद मास कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि शाम 5.08 तक, तदुपरांत अष्टमी प्रारंभ, भद्रा प्रातः 5.45 तक, श्री कृष्ण जन्माष्टमी, शीतला अष्टमी व्रत

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