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सपा में मंथन का दौर शुरू, 25 मार्च को राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक

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-अखिलेश यादव चुनेंगे नेता प्रतिपक्ष
-कुनबे को एक जुट करने की भी तैयारी
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में समाजवादी सरकार की करारी शिकस्त के बाद अब सपा में मंथन का दौर शुरू हो गया है। इस चुनाव में हार से अलबत्ता सपा को काफी नुकसान उठाना पड़ा है लेकिन इस हार से यह कयास लगाये जा रहे है कि शायद इससे सबक लेते हुए कुनबा फिर एक हो जाये। गुरूवार को हुई सपा की बैठक में उत्तर प्रदेश विधानसभा में विपक्ष के नेता का चयन आज नहीं हो सका लेकिन नेता प्रतिपक्ष चुनने के लिये समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव को अधिकृत किया गया है।
सपा प्रवक्ता राजेन्द्र चैधरी ने यहां बताया कि विधानसभा चुनाव में नवनिर्वाचित विधायकों की आज पार्टी मुख्यालय पर हुई बैठक में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित करके नेता विपक्ष तथा अन्य पदाधिकारियों के चयन के लिये पार्टी अध्यक्ष अखिलेश को अधिकृत किया गया है। उन्होंने बताया कि बैठक में आगामी 25 मार्च को पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक आयोजित करने का निर्णय भी लिया गया। चैधरी ने बताया कि अखिलेश ने विधायकों से कहा कि चुनाव में पार्टी की हार पर उनके चेहरों पर उदासी नहीं आनी चाहिये। सपा का चरित्र ही संघर्ष करने का रहा है। अब जीवन का संग्राम पुरजोर तरीके से लडा जाएगा। उन्होंने बताया कि बैठक में चुनाव में सपा की हार की कोई समीक्षा नहीं की गयी है। बैठक में नवनिर्वाचित विधायकों ने कहा कि भाजपा ने विधानसभा चुनाव में जिन तरीकों का इस्तेमाल किया, वे लोकतंत्र के लिये खतरा हैं। भगवा दल ने मतदाताओं को गुमराह करके चुनाव जीता है।
सपा प्रवक्ता के अनुसार विधायकों ने इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन में गडबडी का आरोप भी लगाया और कहा कि भविष्य में सभी चुनाव मतपत्रों के जरिये ही कराये जाने चाहिये।  हालांकि हाल में सम्पन्न विधानसभा चुनाव को रद्द करने की मांग नहीं उठी। बैठक में अखिलेश के राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी रहे उनके चाचा शिवपाल सिंह यादव समेत सपा के सभी नवनिर्वाचित विधायक मौजूद थे।
गौरतलब है कि विगत दिनों सम्पन्न विधानसभा चुनाव में सपा 47 सीटें जीतकर सबसे बडी विपक्षी पार्टी बनी है और उसके सामने नेता प्रतिपक्ष का चयन करने की चुनौती है। माना जा रहा था कि नेता प्रतिपक्ष को लेकर बनी संशय की स्थिति आज की बैठक के बाद खत्म हो जाएगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ। वैसे अखिलेश के पास विकल्प बहुत सीमित हैं। इस पद के लिये सबसे प्रमुख और अनुभवी राजनेताओं में उनके राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी शिवपाल सिंह यादव और आजम खां शामिल हैं। हालांकि एक नाम अखिलेश के विश्वासपात्र बलिया के बांसडीह से विधायक रामगोविन्द चैधरी का भी लिया जा रहा है।
नेता प्रतिपक्ष के सम्भावित चेहरों में बांसडीह से विधायक पूर्व कैबिनेट मंत्री रामगोविन्द चैधरी भी शामिल हैं। वह अखिलेश के विश्वासपात्र हैं और उनकी गिनती सपा के मुखर और स्पष्टवादी नेताओं में की जाती है। अखिलेश खुद विधान परिषद का सदस्य होने के नाते उच्च सदन में वरिष्ठ नेता अहमद हसन की जगह विपक्ष के नेता की भूमिका में आ सकते हंै।

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