“सभी धर्मों का मूलमंत्र प्रेम एवं करूणा“: परम पावन दलाई लामा

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-भारत को अपनी सर्वधर्म की शक्ति को दुनिया को दिखाने की जरुरत
-मानव आज स्वंय अपनी लापरवाही व अज्ञानता से पैदा कर रहा है समस्या
भोपाल । आज विश्व में हिंसा, भूखमरी जैसी कई ऐसी समस्याएं हैं जिन्हें मानव ने खुद ही अपनी लापरवाही एवं अज्ञानता से पैदा किया है, क्योंकि अब लोंगो में करणा, प्रेम एवं दया नष्ट होती जा रही है। इससे साथ-साथ दुनिया में गरीबी एवं अमीरी की खाई में अन्तर  बहुत बढ़ता जा रहा है। जिसके चलते हम आज विभिन्न दुःख व क्लेश के मकड़जाल में उलझते जा रहे हैं। उक्त बातें रविवार को तिब्बतियों के सर्वोच्च धर्मगुरू परम पावन दलाई लामा ने भोपाल में एक कार्यक्रम के दौरान कहीं।
भोपाल में आयोजित “आनंदित रहने की कला“  विषयक सेमीनार में मुख्यअतिथि के पद से सम्बोधित करते हुए परम पावन ने कहा, ‘हम इन मानव निर्मित समस्याओं को दूर करने के लिए या तो नाम मात्र का प्रयास करते हैं या उनकी अनदेखी करते हैं, लेकिन कोई भी समझदार व्यक्ति इसकी अनदेखा नहीं करेगा। इसलिए इन समस्याओं की अनदेखी करना बिलकुल गलत है। उन्होंने कहा, ‘इन समस्याओं के लिए उदासीन रहना गलत है। उन्होंने कहा कि भारत सर्वधर्म पर रहने वाला देश है। भारत के भाई-बहनों के लिए अब समय आ गया है कि वे भारत के सर्वधर्म, धार्मिक सौहार्द एवं समरसता को दुनिया को दिखायें. दुनिया को दिखायें कि आपके (भारत के) पास एक खास चीज है। विश्व के कई हिस्सों में धार्मिक आस्थाओं के बीच संघर्ष के बाबत दलाई लामा ने धार्मिक सौहार्द, समरसता एवं धर्मनिरपेक्षता की हिमायत करते हुए कहा कि विश्व में भारत ही सर्वधर्म वाला देश है और यहां के लोगों को इसे दुनिया को दिखाने की जरुरत है। उन्होंने हालांकि कहा, ‘भारत में सभी धर्मों के लोग शांतिपूर्वक रहते हैं। कभी-कभी राजनीतिज्ञों के कारण यहां कुछ समस्याएं हो जाती हैं।
उन्होंने कहा, ‘वर्षों से भारत में करणा एवं प्रेम रहा है. यदि आप करणा एवं प्रेम से रहेंगे, तो दुनिया में कहीं भी रहेंगे, निश्चित रूप से सुखी रहेंगे। दलाई लामा ने कहा, ‘सभी धर्मों का मूलमंत्र प्रेम एवं करणा है। उन्होंने कहा कि आज की दुनिया में सात अरब के आसपास लोग किसी न किसी आपदाओं या ऐसी समस्याओं से जूझ रहे हैं जो हमारे नियंत्रण में नहीं हैं।
जाति प्रथा को सबसे बड़ी सामाजिक बुराई बताते हुए दलाई लामा ने कहा कि इससे समाज को लाभ नहीं हो सकता है। इन सबको छोड़ने की जरुरत है, क्योंकि यह पुराने हो गये हैं। सभी धर्म गुरुओं को इनके खिलाफ आवाज उठानी चाहिए। उन्होंने कहा, ‘सभी धर्मों का उद्देश्य प्रेम है. कोई भी धर्म सर्वश्रेष्ठ नहीं होता। दलाई लामा ने कहा, ‘मैंने कभी नहीं कहा कि बौद्ध धर्म सबसे अच्छा धर्म है। उन्होंने कहा, ‘आजकल शिक्षा ने भौतिक रूप ले लिया है, जो पर्याप्त नहीं है। शिक्षा पद्धति को धर्मनिरपेक्ष, आंतरिक मूल्यों, प्रेम एवं सहिष्णुता पर आधारित होनी चाहिए, न कि धर्म पर आधारित।

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