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सारनाथ में निकली भगवान बुद्ध के पवित्र अस्थि की भव्य शोभायात्रा

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विजय श्रीवास्तव
-तीसरे दिन भी हजारों बौद्ध अनुयायियों ने किया पवित्र अस्थि का दर्शन
-हाथी की पालकी पर बौद्ध अस्थि को रख कर निकली शोभायात्रा
-आज वैभव व सम्प्रभुता की परिभाषा बदल गयी है: प्रो. टी एन सिंह
वाराणसी। आस्था व तपस्या की तपोभूमि पर आज भगवान बुद्ध की पवित्र अस्थियों का भव्य शोभायात्रा निकाली गयी। हाथी पर भगवान बुद्ध की पवित्र अस्थियों को रखा गया था। उसके पीछे एक रथ चल रहा था जिसपर भगवान बुद्ध की मूर्ति रखी हुई थी। भव्य शोभायात्रा में देश-विदेश के आये हजारों बौद्ध अनुयायी बुद्धम् शरणम् गच्छामि, संघम् शरणम् गच्छामि, धम्मं् शरणम् गच्छामि का उद्घोष करते हुए चल रहे थे। इस दौरान हजारों की संख्या में स्कूली छात्र हाथों में पंचशील का झण्डा लिए रहे थे।

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मूलगंध कुटी विहार के 87 वें वर्षगाठ पर सारनाथ में आज तीसरे व अन्तिम दिन हजारों बौद्ध अनुयायिओं ने भगवान बुद्ध के पवित्र अस्थि का दर्शन किया। सुबह से ही मूलगंध कुटी विहार परिसर में रखे अस्थि का दर्शन के लिए देश-विदेश से आये बौद्ध अनुयायिओं की लम्बी लाइन लग गयी थी। ‘बुद्धम् शरणम् गच्छामि‘ के उद्घोष से पूरा सारनाथ गंुजायमान हो रहा था। कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर भगवान बुद्ध की अस्थि को तीन दिनों के लिए बौद्ध अनुयायियों के दर्शनार्थ रखा गया था। तत्पश्चात अपराह्न 1 बजे से भगवान बुद्ध की पवित्र अस्थियों की भव्य शोभायात्रा निकाली गयी। जो मूलगंध कुटी विहार परिसर से प्रारम्भ होकर सारनाथ के विभिन्न स्थलों का भ्रमण करते हुए सारनाथ खण्डहर परिसर होते हुए पुनः मूलगंध कुटी पर समाप्त हुई। शोभायात्रा में आगे-आगे हाथी चल रहे थे वहीं उसके पीछे रथ व उसके पीछे बौद्ध अनुयायी धर्मशील झण्डे को लेकर चल रहे थे।

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शाम को मूलगंध कुटी विहार के 87 वें वर्षगाठ पर आयोजित सार्वजनिक सभा को सम्बोधित करते हुए महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के कुलपति प्रोफेसर टी एन सिंह ने कहा कि आज वैभव व सम्प्रभुता की परिभाषा बदल गयी है। आज इसे आर्थिक साम्राज्य से जोड कर देखा जा रहा है। आज समाज में कटुता, एक दूसरे प्रति घृणा का भाव, अराजकता बढता जा रहा है। जबकि समाज के विकास के लिए समरसता की आवश्यकता होती है जो कि भगवान बुद्ध के विचारों से ही आ सकती है। आज बुद्ध के अंिहंसा के भाव को जन-जन तक पहुंचाने की आवश्यकता हेै। तभी हमारी पुरानी विश्वबधुंत्व की भावना को फिर से साकार किया जा सकेगा। उन्होंने उपस्थित विद्यार्थियों से कहा कि अनुशासन व कठिन परिश्रम आपकी पूंजी है। जहां तक धर्म का प्रश्न है वह अनुशासन की परिधि से ही आता है। यहां पढने वालें बच्चों की जिम्मेदारी इसलिए और बढ जाती है कि वे भगवान बुद्ध की स्थली पर अध्ययन कर रहे है। उनके विचारों को जन-जन तक पहुचाने की जिम्मेदारी उनके कंधे पर ही है। इस दौरान श्री लंका के हाई कमीश्नर एस्टिन फेरान्डो ने कहा कि आज भगवान बुद्ध के विचारों की विश्व को जरूरत है क्योंकि उनके विचारों से ही आज विश्व में फैल रही अराजकता को कम किया जा सकता हेै। स्वागत महाबोधि सोसायटी के संयुक्त सचिव भन्ते के मेघांकर थेरो ने तथा धन्यवाद विज्ञापन महाबोधि विद्या परिषद के अध्यक्ष प्रो राम मोहन पाठक ने किया। इस दौरान सोसायटी के महासचिव भन्ते पी सिबली थेरो ने लोंगो को पंचशील का पाठ कराया। संचालन महाबोधि इन्टर कालेज के प्राचार्य डाॅ बेनी माधव ने किया।

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शाम को पूरे मूलंगध कुटी विहार को हजारों दीपों से सजाया गया था। इस दौरान श्री लंका व ताइवान से कलाकार अपने पारम्परिक वेश भूषा व वाद्य यन्त्रों को बजाते हुए नृत्य किया। इससे पूर्व सुबह मूलंगध कुटी विहार स्थिति बुद्ध मन्दिर में विधिवत पूजा पाठ किया गया । इस दौेेरान बोधि वृक्ष के समीप विशेष पूजा व विश्व शान्ति प्रार्थना के साथ तीन दिवसीय पूजा का समापन हो गया।

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