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सुप्रीम कोर्ट ने तीनों कृषि कानूनों पर लगाई रोक, बनाई गई कमेटी

विजय श्रीवास्तव
ः सुप्रीम कोर्ट को कमेटी अपनी रिपोर्ट सौंपेगी
ः कमेटी की रिपोर्ट आने तक रहगी रोक
ः कमेटी ही निभाएगी अब निर्णायक भूमिका
ः 50 दिनों से जारी है किसानों की आन्दोलन

नई दिल्ली। आखिरकार केंन्द्र सरकार द्वारा लाए गए तीनों कृषि कानूनों के अमल पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने एक कमेटी का गठन किया है जो अपनी रिपोर्ट कोर्ट को ही सौपेगी। यानि सुप्रीम कोर्ट ने तीनों कृषि कानूनों पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है और एक कमेटी का गठन करने का आदेश दिया है। इससे पहले कोर्ट ने समिति के पास न जाने की बात पर किसानों को फटकार लगाई है और कहा कि हम समस्या का हल चाहते हैं, मगर आप अनिश्चितकालीन आंदोलन करना चाहते हैं तो आप कर सकते हैं। यानि तीनों कृषि कानून के अमल होने पर कमेटी की रिपोर्ट आने तक रोक रहेगी। केंद्र सरकार ने जिन तीन कृषि कानूनों को पास किया, उसका लंबे वक्त से विरोध हो रहा था और विगत 50 दिनों से दिल्ली की सीमाओं पर हजारों की संख्या में किसान आंदोलन कर रहे हैं, इसी के बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट के पहुंचा।
आज पुनः सुप्रीम कोर्ट में महत्वपूर्ण सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस की अगुवाई वाली बेंच ने इस मामले की सुनवाई करते हुए तीनों कृषि कानूनों पर रोक लगाई, साथ ही एक कमेटी का गठन कर दिया है, जो कि सरकार और किसानों के बीच कानूनों पर जारी विवाद को समझेगी और सर्वोच्च अदालत को रिपोर्ट सौंपेगी।
मंगलवार की सुनवाई में किसानों की ओर से पहले कमेटी का विरोध किया गया और कमेटी के सामने ना पेश होने को कहा. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख बरता और कहा कि अगर मामले का हल निकालना है तो कमेटी के सामने पेश होना होगा।
ऐसे में अब कोई भी मुद्दा होगा, तो कमेटी के सामने उठाया जाएगा। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने ये भी साफ किया कि कमेटी कोई मध्यस्थ्ता कराने का काम नहीं करेगी, बल्कि निर्णायक भूमिका निभाएगी।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा जिस कमेटी का गठन किया गया है, उसमें कुल चार लोग शामिल होंगे, जिनमें भारतीय किसान यूनियन के भूपेंद्र सिंह मान, डॉ. प्रमोद कुमार जोशी, अशोक गुलाटी (कृषि विशेषज्ञ) और अनिल घनवंत शामिल हैं। ये कमेटी अपनी रिपोर्ट सीधे सुप्रीम कोर्ट को ही सौंपेगी, जबतक कमेटी की रिपोर्ट नहीं आती है तबतक कृषि कानूनों के अमल पर रोक जारी रहेगी।

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