सैन्य तैयारी: आर्मी के पास मात्र 10 दिन लड़ाई के लिए गोला-बारूद, सीएजी का खुलासा

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-दो वर्ष पहले मई 2015 में भी कैग ने दी थी चेतावनी
-कैग ने बकायदा आर्मी के कम होते गोला-बारूद के भंडार पर विस्तृत रिपोर्ट संसद में रखी थी
नई दिल्ली। चीन व पाकिस्तान को जमीन से आकाश में मात देने की बात करने वाले भारतीय आर्मी के पास केवल 10 दिन जंग के लिए ही गोला-बारूद है। कैग ने शुक्रवार को एक बार फिर सरकार को बताया कि आर्मी के पास बेहद कम गोला-बारूद बचा है। आज अगर आर्मी को जंग करनी पड़ जाए तो इस्तेमाल किए जाने वाले असलहों (हथियार और दूसरे सामान) में से 40 प्रतिशत तो 10 दिन भी नहीं चल पाएंगे। 70 प्रतिशत टैंक और तोपों के 44 प्रतिशत गोलों का भंडार भी 10 दिन ही चल पाएगा। उल्लेखनीय है कि कैग ने दो वर्ष पहले भी संसद में आर्मी के भण्डार में कम हो रहे गोला-बारूद की विस्तृत रिपोर्ट संसद के पटल पर रखी थी लेकिन दो वर्ष बीतने के बाद भी सरकार ने इसपर कोई कदम नहीं उठाया।
गौरतलब हेै कि नियमानुसार जंग की स्थिति में आर्मी के पास 40 दिन का गोला-बारूद का भंडार होना चाहिए। जबकि आज मात्र 10 दिन का ही गोला-बारूद है। यह उस स्थिति तब है कि जब आज पाकिस्तान के साथ चीन से युद्ध के हालात बने हुए है। यह और सोचनीय है कि जब दो साल पहले मई 2015 में भी कैग ने आर्मी के कम होते गोला-बारूद के भंडार पर डिटेल रिपोर्ट संसद में रखी थी। उसके बावजूद कोई कदम नहीं उठाना आश्चर्य जनक लगता हेै।    – शुक्रवार को कैग ने संसद में अपने फॉलोअप ऑडिट रिपोर्ट पेश करते हुए बताया है कि सेना के इस्तेमाल किए जाने वाले अलग-अलग तरह के असलहे में से 80 प्रतिशत का भंडार 40 दिन लायक नहीं है। कैग ने अपनी रिपोर्ट में लिखा की है कि तीन साल बाद भी जंग के लिए जरूरी भंडार रखने के लिहाज से कोई खास सुधार नहीं आया। रिपोर्ट में कहा गया है, मार्च 2013 के बाद भी सेना के गोला-बारूद भंडार में गंभीर कमी और ऑर्डनेंस फैक्ट्री बोर्ड की तरफ से सप्लाई किए गए गोला-बारूद की क्वालिटी में कोई खास सुधार नहीं आया।
कैग ने अपने रिपोर्ट में कहा है कि तोपों में इस्तेमाल होने वाले फ्यूज की आर्मी के पास बहुत ज्यादा कमी है। आर्मी ने बिना कोई तैयारी किए मैनुअल के बजाय इलेक्ट्रॉनिक फ्यूज पर शिफ्ट होने का फैसला कर लिया था। 2015 की रिपोर्ट में 89 प्रतिशत फ्यूज कम थे। तीन साल बाद भी 83 प्रतिशत फ्यूज की कमी बनी हुई है। 88 प्रतिशत  गोला-बारूद सिर्फ पांच दिन की ट्रेनिंग में खत्म हो जाएगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि न केवल युद्ध, बल्कि सैनिकों की ट्रेनिंग के लिए जरूरी गोला-बारूद का भी भंडार कम है।
कैग ने पिछली रिपोर्ट में 2008-09 से 2012-13 तक का आॅडिट किया था। इसमें 170 तरह का असलहा शामिल था। जनवरी 2017 में कैग ने फॉलोअप ऑडिट किया। इसमें अप्रैल, 2013 से सितम्बर 2106 तक के आंकड़े शामिल हैं। 152 प्रकार के असलहे इसमें शामिल हैं। 2008 से 2013 के दौरान खरीदारी के लिए 9 आइटम पहचाने गए थे, लेकिन, 2014 से 2016 के दौरान इनमें से सिर्फ पांच पर ही काम हो सका।

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