बीएचयू कार्डियोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रो. ओमशंकर का आमरण अनशन: 90 बेड की मांग

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बीएचयू के कार्डियोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रो. ओमशंकर ने अपनी मांगों को लेकर आमरण अनशन शुरू कर दिया है। अनशन से पहले, आईएमएस निदेशक प्रो. एसएन शंखवार और चीफ प्रॉक्टर ने उन्हें मनाने का प्रयास किया, लेकिन वे असफल रहे। इसके बाद, प्रो. ओमशंकर ने आमरण अनशन का ऐलान कर दिया।

90 बेड की मांग और अनशन की वजह

प्रो. ओमशंकर का कहना है कि कार्डियोलॉजी विभाग में 90 बेड होने चाहिए, लेकिन उन्हें केवल 47 बेड मिले हैं। एमएस ने 41 बेड पर डिजिटल लॉक लगा दिया है, जिससे मरीजों की भर्ती नहीं हो पा रही है। इस स्थिति को लेकर प्रो. ओमशंकर ने आमरण अनशन शुरू किया है।

आईएमएस निदेशक और चीफ प्रॉक्टर की असफल कोशिश

सुबह दस बजे, आईएमएस निदेशक और चीफ प्रॉक्टर प्रो. ओमशंकर के घर पहुंचे और लगभग आधे घंटे तक बातचीत की। सहमति न बनने पर, निदेशक और चीफ प्रॉक्टर वापस लौट गए। इसके बाद, प्रो. ओमशंकर सुबह 11:30 बजे वीसी आवास पहुंचे, जहां सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें रोक लिया। इसी स्थान पर उन्होंने अपना आमरण अनशन शुरू कर दिया।

अपने चैंबर में धरना

दोपहर एक बजे के करीब, चीफ प्रॉक्टर और लंका एसओ उन्हें मनाने पहुंचे। पांच मिनट की बातचीत के बाद, प्रो. ओमशंकर ने अपने चैंबर में धरना शुरू किया। वे जमीन पर बैठकर ही मरीजों को परामर्श दे रहे हैं।

बेड पर डिजिटल लॉक और मरीजों की समस्या

प्रो. ओमशंकर ने बेड पर लगे डिजिटल लॉक के लिए एमएस को जिम्मेदार ठहराया है और कुलपति से एमएस को हटाने की मांग की है। उन्होंने कुलपति, आईएमएस निदेशक, जिलाधिकारी और रजिस्ट्रार को अनशन की जानकारी दी है। सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक में हृदय रोग विभाग के 41 बेड पर डिजिटल लॉक के कारण मरीजों की भर्ती नहीं हो पा रही है। पिछले तीन सालों में, 34 हजार मरीज बेड न मिलने के कारण बिना इलाज के लौट गए हैं।

प्रशासन से अनुरोध

प्रो. ओमशंकर का कहना है कि जब तक उनकी मांगे पूरी नहीं की जातीं, वे अनशन जारी रखेंगे। उन्होंने प्रशासन से अनुरोध किया है कि वे जल्द से जल्द इस समस्या का समाधान करें ताकि मरीजों को उचित चिकित्सा सुविधा मिल सके।

निष्कर्ष

बीएचयू के कार्डियोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रो. ओमशंकर का आमरण अनशन अस्पताल की बेड व्यवस्था की गंभीर समस्या को उजागर करता है। उनकी मांगें न केवल विभाग के सुधार के लिए हैं बल्कि मरीजों की सुविधा के लिए भी महत्वपूर्ण हैं। प्रशासन को इस मामले में त्वरित कदम उठाने चाहिए ताकि मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें और अस्पताल की व्यवस्था सुचारू रूप से चल सके।

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