Dhirendra Shastri Baba : बागेश्वर बाबा ने इंग्लैंड में कोहिनूर वापसी के लिए कह दी बड़ी, पर्ची पर अंग्रेजों के भी होश उड़े

Dhirendra Shastri Baba

बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री ने किया Kohinoor का जिक्र

Dhirendra Shastri Baba : बागेश्वर धाम के प्रमुख धीरेंद्र शास्त्री ने अपने भक्तों के बीच कोहिनूर की वापसी के संबंध में बात कही है। कोहिनूर हीरे की चर्चा हमेशा से होती आ रही है, और भारत वापसी की बातें भी करी जा रही हैं। इन दिनों, बाबा बागेश्वर सात समंदर पार इंग्लैंड में हैं और वहां से उन्होंने कोहिनूर की पर्ची निकाल दी है। जैसे ही रामकथा में बाबा ने कोहिनूर का जिक्र किया, पूरा हॉल तालियों से गूंज उठा। बाबा ने अंग्रेजों के सामने कोहिनूर को भारत ले जाने की बात कही, जिससे वहां मौजूद हिंदुस्तानियों की सीना गर्व से चौड़ी हो गई।

‘चिंता मत करो Kohinoor लेकर आएंगे’

बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि सामने हमारे जैसे बैठे हैं। बगल में अति VIP, इस तरफ और भी VIP और कुर्सियों पर बैठे हैं। कथा सुन रहे हैं टकटकी लगाकर। कुछ लोग तो कल कह रहे थे फोन लगाकर गुरु जी कब आओगे भारत? मैंने एक सज्जन से कह दिया हमको तो अब यहीं अच्छा लगने लगा। बोले कब आओगे? हमने कहा चिंता मत करो कोहिनूर लेकर आएंगे।

इंग्लैंड में दिखा बाबा का दिलचस्प अंदाज

इंग्लैंड के विभिन्न शहरों में बागेश्वर धाम के विधायक सरकार अपना दरबार स्थापित कर रहे हैं और उसी दरबार के माध्यम से वे सनातन धर्म का प्रचार-प्रसार करने का प्रयास कर रहे हैं। बाबा बागेश्वर अपने भाषणों में सच्चाई से बोलते हैं और लोगों को उनका इतिहास, वर्तमान और भविष्य विस्तार से बताते हैं। इंग्लैंड में भी उनका यही दिलचस्प अंदाज लोगों को आकर्षित कर रहा है।

Kohinoor हीरे की इतिहासिक महत्व

कोहिनूर हीरा करीब 800 साल पहले आंध्र प्रदेश के गुंटूर जिले में मौजूद गोलकुंडा की खदान से निकाला गया था जो आज भी दुनिया का सबसे बड़ा हीरा है। इसका पहले का वजन 793 कैरेट था, हालांकि इसके बाद इसे कई बार तराशा गया और इसका वजन आज 105.6 कैरेट का है। यह हीरा जमीन से सिर्फ 13 फीट की गहराई पर मिला था।

भारत का कोहिनूर के प्रति अधिकार

गोलकुंडा की खदान से निकलने के बाद इस हीरे के पहले मालिक काकतिय राजवंश थे। 1850 में अंग्रेज इसे अपने साथ इंग्लैंड ले गए और वहीं है। भारत इस पर अपना दावा करता रहा है और इसे वापस लाने के प्रयास भी लगातार जारी हैं।

धीरेंद्र शास्त्री के वाक्यों से भरी इस घटना के जरिए, बाबा बागेश्वर ने अपने भक्तों को विश्वास दिलाया है कि कोहिनूर हीरे की वापसी का सपना जल्द ही साकार होगा। उन्हें भारत के संस्कृति और धरोहर को बेजोड़ रखने के लिए यह प्रयास करने के लिए बहुत सम्मान और सहायता मिलेगी। इस अनोखी खोज के लिए धीरेंद्र शास्त्री को बधाई और शुभकामनाएं।

By Vijay Srivastava