भारतीय न्याय संहिता : पुलिस के अधिकार बढ़े

भारतीय न्याय संहिता में हुए संशोधनों से पुलिस के अधिकारों में काफी वृद्धि हुई है। हालांकि, इस नए कानून से वादकारियों को भी लाभ मिलेगा। देश के तीनों नए कानूनों के माध्यम से मुकदमों का निस्तारण समयबद्ध ढंग से होगा, जिससे न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव आएगा।

वादकारियों को मिलेगा त्वरित न्याय

फौजदारी के अधिवक्ता विकास सिंह का कहना है कि नए कानूनों से वादकारियों को त्वरित न्याय प्राप्त होगा। उन्होंने यह भी कहा कि न्यायालयों पर मुकदमों का बोझ कम होगा, जिससे न्याय प्रक्रिया सुगम और शीघ्र हो सकेगी।

पुलिस के अधिकारों में वृद्धि से अराजकता की आशंका

विकास सिंह ने यह भी कहा कि नए कानून से पुलिस के अधिकार बढ़ गए हैं, जिससे अराजकता फैलने की आशंका भी हो सकती है। हालांकि, उन्होंने विश्वास जताया कि कुछ समय बाद सभी संबंधित पक्ष इस नए कानून के साथ अभ्यस्त हो जाएंगे।

राजद्रोह का कानून समाप्त

इस नए कानून में अंग्रेजों द्वारा अपने फायदे के लिए बनाए गए राजद्रोह के कानून को समाप्त कर दिया गया है, जिससे आमजनमानस को राहत मिली है। इसके अलावा, गिरोहबंद अपराधों के लिए भी कड़े प्रावधान किए गए हैं, जिससे अपराधों पर अंकुश लगेगा।

न्यायिक प्रणाली को मिलेगी नई दिशा

विकास सिंह ने कहा कि नए कानूनों से न्यायिक प्रणाली को नई दिशा मिलेगी और वादकारियों के हित में यह उचित कदम साबित होगा। हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि इस नए कानून को समझने और अपनाने में अधिवक्ताओं, न्यायिक अधिकारियों और पुलिस को कुछ समय लगेगा, लेकिन जल्द ही सब इससे अभ्यस्त हो जाएंगे।

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