सुभाष चन्द्र बोष को श्रद्धाजंली देकर याद किया कायस्थ समिति के सदस्यों ने

सुभाष चन्द्र बोष
सुभाष चन्द्र बोष

न्यूज डेस्क
विजय श्रीवास्तव
वाराणसी। भारत के प्रमुख स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों और महान क्रांतिकारियों में से एक नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 125वीं जयंती आस्था व तपस्या की तपोभूमि सारनाथ के समीप अनमोल नगर चित्रांश रमेश चन्द्र श्रीवास्तव के आवास पर मनायी गयी। इस दौरान कायस्थ समिति के सभी सदस्यों ने नेता जी को अपने श्रद्धासुमन अर्तित किए। इस दौरान एक विचार गोष्ठी का आयोजन भी किया गया।
विचार गोष्ठी की शुरूआत कायस्थों के अराध्य देव श्री चित्रगुप्त जी के पूजन व आरती के साथ प्रारम्भ हुआ। इसके बाद उपस्थित सदस्यों ने नेता जी को माल्यापर्ण कर उनके कृत्यों को याद किया। इस दौरान चित्रांश रमेश चन्द्र श्रीवास्तव ने कहा कि जिस समय नेता जी देश की आजादी के लिए बिगुल बजायी उस समय परिस्थितियॉ बिल्कुल विपरित थी लेकिन उसके बावजूद उन्होंने भारत में हीं नहीं वरन् विश्व में भी भारत की आजादी के लिए अलख जगाने का काम किया। चित्रांश हरि मोहन श्रीवास्तव ने इस दौरान कहा कि हमें नेता के जीवन से प्रेरणा लेने की जरूरत है। इसके लिए हम सबको साथ मिलकर अपने समाज के लिए काम करना होगा। उन्होंने इस दौरान संगठन के निमित्त कुछ सुझाव भी दिए। चित्रांश भरत श्रीवास्तव ने नेता जी के जीवन वृत पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वे युवाओं के प्रेरणाश्रोत रहे। डॉ ओ पी श्रीवास्तव ने हम सब नेता जी के मार्ग पर चल कर उन्हें सच्ची श्रद्धाजंली दे सकते हैं।


इस दौरान चित्रांश प्रकाश श्रीवास्तव ने कहा कि कायस्थ समाज के लिए बहुत संगठन काम कर रहे हैं लेकिन आज एक दो संगठन को छोड कर कोई भी नेता जी के लिए कार्यक्रम आयोजित नहीं कर रहा है। यह एक सराहनीय प्रयास है कि यह संगठन अपने अराध्य देव के साथ अपने समाज के मनीषियों को भी याद करता है। इस दौरान चित्रांश राहुल सिन्हा ने अपने ओजस्वी विचार के तहत कहा कि एक ओर जहां हम कलम की पूजा करते हैं वहीं हमारें समाज के एक मनीषी नेता जी ने वह पराक्रम ओैर जौहर दिखाया जो समाज के लिए एक प्रेरणा है। आज कलम और पराक्रम के बीच तालमेल रखने की आवश्यकता है।तभी हमारा समाज आगे बढ सकता है।


चित्रांशी रेखा श्रीवास्तव ने इस दौरान सुभाष चन्द्र बोष के जीवन वृत्त पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उनके पराक्रम का ही असर रहा कि 12 हजार बिट्रिश सैनिक सहित 11 देश उनके समर्थन में आ गये। इस दौरान चित्रांश विजय प्रकाश श्रीवास्तव ने कहा कि समिति के हर सदस्य को अपने समाज के लिए समर्पित होने की जरूरत है। जहां चाह है वहां राह अवश्य निकलेगी। हम सच्चे मन से जब कुछ करने की कोशिश करेंगे तो लोग भी हमारे मिशन में जुडेंगे। चित्रांश अरविन्द श्रीवास्तव ने कहा कि नेता जी जिस समय देश के लिए पूरे विश्व में अलख जगा रहे है थे, वह आज के संशाधन से कोशों दूर था लेकिन उसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और अपने मिशन में अन्तिम समय तक लगे रहें।
नेता जी को श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए चित्रांश बी एल श्रीवास्तव ने कहा कि हम एक है लेकिन उसके बावूजद दूर है आखिर क्यों। हम करना चाहते हैं लेकिन आखिर क्यों नहीं कर पा रहे हैं इस पर मथंन करने की आवश्यकता है। इस दौरान संस्था के सचिव चित्रांश हरि शंकर सिन्हा ने कहा कि हम सब को मिलकर आज संगठन को आगे ले जाने की आवश्यकता है। हमें अपने समाज के लिए अगर कुछ करना है तो आगे आना होगा।


विचार गोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए संस्था के अध्यक्ष चित्रांश मोहन लाल श्रीवास्तव ने नेता जी के जीवन पर विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि सुभाष चंद्र बोस एक भारतीय राष्ट्रवादी और महान स्वतंत्रता सेनानी थे जिन्होंने ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के खिलाफ जोरदार अभियान चलाया और भारतीयों के बड़े नायक बन गए. बोस को पहली बार 1942 की शुरुआत में जर्मनी में हिटलर द्वारा उन्हें सबसे पहली बार ‘नेताजी’ के नाम से बुलाया गया था। जो बाद में पूरे भारत में उनके नाम से जुड़ गया।
विचार गोष्ठी का संचालन संस्था के सचिव चित्रांश हरि शंकर सिन्हा ने अध्यक्षता संस्था के अध्यक्ष चित्रांश मोहन लाल श्रीवास्तव ने किया। इस अवसर पर कायस्थ समिति के दर्जनों की संख्या में सदस्य उपस्थित रहे।

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