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अब ग्रुप एडमिन सदस्य के किसी आपत्तिजनक पोस्ट के लिए जिम्मेदार नहीं होगा : बाम्बे कोर्ट

अब ग्रुप एडमिन सदस्य के किसी आपत्तिजनक पोस्ट के लिए जिम्मेदार नहीं होगा
अब ग्रुप एडमिन सदस्य के किसी आपत्तिजनक पोस्ट के लिए जिम्मेदार नहीं होगा

राजीव कुमार सिन्हा, अधिवक्ता
-एक गु्रप एडमिन किशोर तरीने द्धारा दाखिल याचिका पर कोर्ट ने दी व्यवस्था

नई दिल्ली। वाट्सएप चलाने वालों के लिए एक बहुत ही राहत भरी खबर आयी है अभी तक आपने सुना होगा कि वाट्सएप एडमिन पर गु्रप के किसी सदस्य द्धारा आपत्तिजनक पोस्ट के लिए उसे जिम्मेदार ठहरा दिया जाता था। कई बार ग्रुप एडमिन पर अपराधिक मुकदमा भी दर्ज करा दिया जाता था लेकिन अब ऐसा नहीं होगा अब ग्रुप एडमिन सदस्य के किसी आपत्तिजनक पोस्ट के लिए जिम्मेदार नहीं होगा । यानि गुु्रप एडमिन इसके लिए जिम्मेदार नहीं होगा। वाट्सएप चलाने वाले देश के लाखों गु्रुप एडमिन के लिए यह एक राहत भरी खबर है। सीधे शब्दों में अब ग्रुप एडमिन गु्रप के किसी भी सदस्य के आपत्तिजनक पोस्ट के लिए वह जिम्मदेार नहीं होगा और नहीं उसपर कोई अपराधिक मुकदमा दर्ज कराया जा सकता है। वरन् पोस्ट डालने वाला सदस्य ही जिम्मेदार होगा।

एक मामले की सुनवाई करते हुए बांम्बे हाईकोर्ट ने दी व्यवस्था

बाम्बे हाईकोर्ट की नागपुर पीठ ने वाट्सएप के एक ग्रुप एडमिन की याचिका पर दी व्यवस्था
बाम्बे हाईकोर्ट की नागपुर पीठ ने वाट्सएप के एक ग्रुप एडमिन किशोर तरीने द्धारा दाखिल याचिका पर कहा कि वाट्सएप् गु्रप के एडमिन पर ग्रुप के दूसरे सदस्य द्धारा आपत्तिजनक पोस्ट के लिए अपराधिक कार्रवाई नहीं हो सकती। इसके साथ ही ही कोर्ट ने 33 वर्षीय किशोर तरीने के खिलाफ दर्ज यौन उत्पीडन के मामले को खारिज कर दिया। वैसे यह बताना जरूरी होगा कि कोर्ट का यह आदेश पिछले महीने आया था, लेकिन इसकी प्रति 22 अप्रैल को उपलब्ध हुई है।
न्यायमूर्ति जेडए हक और न्यायमूर्ति एबी बोरकर की पीठ ने कहा कि वाट्सएप् के एडमिन के पास केवल ग्रुप केसदस्यों को जोडने व हटाने का अधिकार ही होता है और ग्रुप में डाली गयी किसी पोस्ट को कंट्रोल करने या उसे रोकने की क्षमता नहीं होती है। गौरतलब है कि महाराष्ट्र के गोंदिया जिलें में अपने खिलाफ किशोर तरीने 2016 में भारतीय दंड संहिता की धारा 354-ए (1) (4) (अश्लील टिप्पणी), 509 (महिला की गरिमा भंग करना), 107 (उकसाने) और सूचना प्रौद्योगिकी कानून की धारा 76 (इलेक्ट्रानिक प्रारूप में आपत्तिजनक सामग्री का प्रकाशन ) के तहत दर्ज मामलों को खारिज करने का अनुरोध किया था।

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