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कोरोना के चलते नहीं ले सकेंगे अब नवनिर्वाचित ग्राम प्रधान शपथ ग्रहण, जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव की तैयारी को लगा झटका

कोरोना के चलते नहीं ले सकेंगे अब नवनिर्वाचित ग्राम प्रधान शपथ ग्रहण, जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव की तैयारी को लगा झटका

विजय श्रीवास्तव
-ग्रामीण इलाकों में तेजी से फैल रहे कोरोना संक्रमण के चलते सभी कार्यक्रम पर लगी रोक

लखनऊ। 2 मई को प्रदेश में जीते ग्राम प्रधान अभी शपथ ग्रहण नहीं कर सकेंगे। कोरोना संक्रमण में तेजी से वृद्धि के चलते सरकार ने हाल ही में सम्पन्न हुए ग्राम प्रधानी के चुनाव के बाद ग्राम पंचायतों का गठन और ग्राम प्रधानों व क्षेत्र पंचायत सदस्यों के शपथ ग्रहण को स्थगित करने का निर्णय लिया है। साथ ही जिला पंचायत अध्यक्ष और ब्लॉक प्रमुख के अप्रत्यक्ष चुनाव पर भी ग्रहण लग गया है।
पंचायती राज विभाग से मिल रही जानकारी के मुताबिक नवनिर्वाचित ग्राम प्रधानों, क्षेत्र पंचायत सदस्यों और जिला पंचायत अध्यक्ष व ब्लॉक प्रमुखों के चुनाव के लिए जो प्रस्ताव मुख्यमंत्री ऑफिस को भेजा गया था उसे लौटा दिया गया है। बताया जा रहा है कि ग्रामीण इलाकों में फैले कोरोना संक्रमण की वजह से फिलहाल सभी कार्यक्रम रोक दिए गए हैं।

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यूपी में अब प्रधान नहीं ले पाएंगे शपथ


गौरतलब है कि नवनिर्वाचित ग्राम प्रधानों व ग्राम पंचायत सदस्यों के शपथ ग्रहण और पहली बैठक कराने का पंचायती राज विभाग की तरफ से प्रस्ताव तैयार किया था। 12 से 14 मई तक शपथ ग्रहण कराने की योजना थी। 15 मई को पूरे प्रदेश में एक साथ ग्राम सभा की पहली बैठक कराने का प्रस्ताव था। इसी दिन से नवनिर्वाचित ग्राम पंचायतों के कार्यकाल की शुरुआत मानी जाती। इसके अलावा जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव संबंधी कार्यवाही 20 मई से शुरू करने का प्रस्ताव था। ब्लॉक प्रमुख के चुनाव 14 से 17 मई के बीच कराने की योजना थी। 15 मई को पूरे प्रदेश में एक साथ ग्राम सभा की पहली बैठक कराने का प्रस्ताव था। इसी दिन से नवनिर्वाचित ग्राम पंचायतों के कार्यकाल की शुरुआत मानी जाती। प्रस्ताव पर मुहर लगने के बाद जल्दी ही ग्राम प्रधानों और ग्राम पंचायत सदस्यों के शपथ ग्रहण और पहली बैठक संबंधी दिशा-निर्देश जारी कर दिया जाता, लेकिन अब इसमें देरी होगी।
पंचायत चुनाव में परिणाम आने के बाद भी तमाम प्रधान शपथ नहीं ले पाएंगे क्योंकि सदस्य ग्राम पंचायत के लगभग 10 हजार पद रिक्त हैं। नियम यह है कि सदस्य का दो तिहाई होना अनिवार्य है। अगर सदस्य दो तिहाई नहीं होगा तो प्रधान शपथ नहीं ले सकेगा. लगभग हर चुनाव के बाद स्थिति यही रहती है। ऐसे में विकास कार्य न रुके इसलिए शपथ ग्रहण कराया जाता है, शेष पदों पर चुनाव फिर कराया जाता है। ताकि समस्या न हो।

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जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव की तैयारी को लगा झटका


शपथ ग्रहण कार्यक्रम के टलने से इसका सीधा असर जिला पंचायत अध्यक्ष व क्षेत्र पंचायत प्रमुख के चुनाव पर दिखेगा क्योंकि इस को लेकर सियासी सक्रियता बढ़ गई है। मालूम हो कि सत्तारूढ़ भाजपा व मुख्य विपक्षी दल सपा के बीच त्रिस्तरीय चुनाव में जोरदार टक्कर देखने को मिली है। हजार से अधिक निर्दल प्रत्याशियों ने बाजी मारी है जिन्हें अपने पाले में करने के लिए मारा-मारी व खरीद फरोद तेजी से शुरू भी हो चुका था। सपा व भाजपा ज्यादा से ज्यादा ब्लॉक प्रमुख व जिला पंचायत अध्यक्ष के पदों पर अपने लोगों को काबिज करवाने की होड़ चल रही है। इतना ही नहीं दोनों ही दलों के सांसद, विधायक व पार्टियां विधानसभा चुनाव से पहले अपना दबदबा दिखाने के लिए ज्यादा से ज्यादा पदों पर कब्जे के प्रयास में हैं। क्षेत्र पंचायत सदस्यों का चुनाव पूरी तरह गैरदलीय व्यवस्था में लड़ा गया। अब क्षेत्र पंचायत प्रमुख पदों के लिए दावेदारों ने अधिकतम क्षेत्र पंचायत सदस्यों को अपने पाले में करने के लिए प्रयास शुरू कर दिए हैं। कई जिलों में तो सदस्यों को अपने पक्ष में करने के लिए स्कार्पियों तक देने की बात प्रकाश में आ रही है।

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