RBI Tokenization : 1 अक्टूबर से Credit Card-Debit Card कार्ड को Token बनाना जरूरी, अन्यथा नहीं कर सकेंगे Online खरीददारी

विजय श्रीवास्तव
नई दिल्ली। अगर आप Credit Card-Debit Card का यूज करते है तो आरअीआई 1 अक्टूबर से इसके यूज करने के नियम में बडा बदलाव करने जा रहा है। जिसके तहत आपको अब Token बनवाना जरूरी होगा। यानि 1 अक्टूबर से आप टोकनाइजेशन सिस्टम के अमल में आने के बाद कार्ड होल्डर्स पेमेंट कर सकेंगे। यह टोकन सिस्टम या कार्ड टोकनाइजेशन आखिर क्या है, कार्ड Tokenization करने का प्रासेस क्या है और इसके करने से क्या फायदा है और न करने से क्या नुकसान है। हम आपके इन तमाम प्रश्नों का उत्तर इस लेख में देने की कोशिश करेंगे। आपको हम इस बेबसाइट में इस तरह के अपडेट बराबर देते हैं। आप हमारें बेवसाइट को सस्क्राइब कर लें जिससे आपको बराबर अपडेट मिलता रहें।


Tokenization क्या है


01 अक्टूबर से रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया का कार्ड-ऑन-फाइल टोकनाइजेशन (Tokenization) नियम ला रहा है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) का कहना है कि टोकनाइजेशन सिस्टम के अमल में आने के बाद कार्ड होल्डर्स के पेमेंट करने के अनुभव में सुधार आएगा और डेबिट कार्ड व क्रेडिट कार्ड के ट्रांजेक्शन पहले की तुलना में आप अधिक सुरक्षित होंगे साथ ही आपके साथ धोखाधडी होने पर काफी हद तक लगाम लग सकेगा। नए नियमों के लागू होने के बाद क्रेडिट कार्ड ग्राहक अब प्वाइंट ऑफ सेल मशीनों, ऑनलाइन या किसी ऐप में क्रेडिट कार्ड और डेबिट कार्ड से पेमेंट करेंगे तो उनके कार्ड के डिटेल्स इनक्रिप्टेड टोकन्स के रूप में स्टोर हो जायेगा। वैसे आपको बता दें कि आरबीआई पहले यह नियम 1 जनवरी से लागू होने वाला था। अब पेमेंट कंपनियों को 30 सितंबर 2022 के बाद लोगों के क्रेडिट कार्ड (Credit Card) और डेबिट कार्ड (Debit Card) का डेटा मिटाना होगा।

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Tokenization करने का जानें पूरा प्रोसेस


यानि सीधे शब्दों में आप अगर क्रेडिट कार्ड और डेबिट कार्ड कार्ड का टोकनाइजेशन नहीं करते हैं तो आप विभिन्न प्लेटफॉर्म्स और ई-कॉमर्स वेबसाइटों पर पहले से सेव कार्ड से पेमेंट नहीं कर पाएंगे। तो इसका सीधा अर्थ है कि आपको टोकनाइजेशन करना अनिवार्य होगा। अन्यथा आप विभिन्न प्लेटफॉर्म्स और e-commerce वेबसाइटों पर सेव कार्ड से पेंमेट नहीं कर पायेगे।
1 : इसके लिए पहले आपको किसी e-commerce Website या App को ओपन करना होगा।
2 : अब आपको जो सामान खरीदना हो तो उसे खरीदने के बाद आप पेमेंट ऑप्शन सलेक्ट करें।
3 : अब आपको यहां चेक आउट करते समय पहले से सेव्ड डेबिट और क्रेडिट कार्ड की डिटेल भरें।
4 : अब आपको सिक्योर योर कार्डव पेज पर आरबीआई गाइडलाइंस’ या ’टोकनाइज योर कार्ड पेज पर आरबीआई गाइडलाइंस’ का ऑप्शन दिखेगा।
5 : अब आप इस ऑप्शन को चुनने के बाद आपके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर और ईमेल पर ओटीपी आएगा।
6 : ओटीपी सबमिट करें और ट्रांजेक्शन को कंप्लीट करें।
7 : अब इसके बाद जेनरेट टोकन का ऑप्शन आएगा, इसे आपको सेलेक्ट करना होगा।
8 : यह पूरा प्रासेस करने के बाद अब आपका इसके बाद टोकन जेनरेट हो जाएगा और आपके कार्ड की जानकारियों के बजाय टोकन उक्त वेबसाइट/ऐप पर सेव हो जाएगा।


Tokenization न करने से क्या है फायदा और क्या है नुकसान


आरबीआई जब भी कोई अपडेट करती है। तो वह बहुत ही जांच परख कर करती है। आए दिन हो रहे धोखाधडी से बचने के लिए RBI इस तरह के नये नियम बराबर ले कर आती रहती है। नए नियमों के चलते और आप सेफ होते हैं। अब आप अगर कहेंगे कि अगर हम इस नियम का पालन नहीं करते हैं तो इसका क्या नुकसान होगा। तो आप यह समझिये कि अगर आप कार्ड टोकनाइजेशन नहीं करते हैं तो आप विभिन्न प्लेटफॉर्म्स और ई-कॉमर्स वेबसाइटों पर पहले से सेव कार्ड से पेमेंट नहीं कर पाएंगे क्योंकि पेमेंट कंपनियों को 30 सितंबर 2022 के बाद लोगों के क्रेडिट कार्ड (Credit Card) और डेबिट कार्ड (Debit Card) का डेटा मिटाना होगा। तो इस तरह से आपको टोकनाइजेशन करना ही होगा उससे आप सेफ भी होंगे।

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