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वाराणसी : 113 वर्षीय वयोवृद्ध वैद्य झुलई पहलवान नहीं रहे

विजय श्रीवास्तव
-कई युवाओं को भी पहलवानी को सिखाए दांव
-45 सदस्यों का रहा उनका भरा पूरा परिवार
-बैद्य के रूप में उन्होंने मनुष्यों के साथ पशुओं का भी करते थे उपचार

वाराणसी। भगवान बुद्ध की उपदेश स्थली सारनाथ स्थित सिंहपुर गांव के 113 वर्षीय वयोवृद्ध वैद्य झुलई पहलवान अब नहीं रहे। वैद्य झुलई पहलवान के मरने से एक युग का अंत हो गया, उन्होंने ब्रिटिश सरकार में घोड़ों की टापों को जहां नजदीकी से महसूस किया वहीं भारत की आजादी की नई सुबह को भी अपने सुनहरे सपनों के साथ साकार होते देखा।
स्व. झुलई पहलवान के पुत्र राम दुलार ने बताया कि वह खुद पहलवानी करने के साथ साथ कई युवाओं को भी पहलवानी के दांव सिखाए। सबसे खास बात यह रही उनकी कि वो वैद्य भी रहे और चाहे मनुष्य हो या पशु उनकी शारीरिक बीमारियों को प्राकृतिक जड़ी बूटियों से इलाज करके ठीक किया लेकिन कभी किसी से कोई शुल्क नहीं लिया, वे स्वयं जड़ी बूटियों को खोजकर लाते और दवा बनाकर उनका इलाज करते थे।
जहां तक उनके परिवार की बात की जाए तो उनके चार पुत्र, 2 पुत्रियां, 8 पोते, 15 पोतियां, 1 प्रपौत्र, 4 प्रपौत्री, 3 नाती, 8 नतिनी सहित कुल 45 भरा पूरा परिवार था। उनकी मृत्यु कल 4.30 बजे सायं हो हुआ। उनका दाह संस्कार सरायमोहना में किया गया। मुखाग्नि बड़े पुत्र गौरी शंकर ने दिया।

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