Womens Reservation Bill : क्या पिछली सरकार की तरह से यह विधेयक सिर्फ जुमला है? क्यों सरकार ने बिल में जोड़ा परिसीमन का प्रावधान

Womens Reservation Bill : क्या पिछली सरकार की तरह से यह विधेयक सिर्फ जुमला है? क्यों सरकार ने बिल में जोड़ा परिसीमन का प्रावधान

महिला आरक्षण विधेयक का इतिहास

Womens Reservation Bill : महिला आरक्षण विधेयक ऐतिहासिक है, लेकिन इसके पारित होने की प्रक्रिया में सरकार और विपक्ष के बीच तनाव है। विपक्ष यह प्रश्न उठाता है कि सरकार ने इस विधेयक में परिसीमन और जनगणना की शर्त क्यों जोड़ी? यदि इन शर्तों का समापन नहीं हुआ होता, तो महिलाओं को 2024 के लोकसभा चुनाव से ही आरक्षण का लाभ मिल सकता था। अब, हमें 2029 के लोकसभा चुनाव से ही इसके पूर्ण लागू होने की उम्मीद है।

विधेयक में शामिल बदलाव

विधेयक के जरिए, संविधान में एक नया अनुच्छेद 334(ए) जोड़ने का प्रस्ताव है, जिसके तहत महिलाओं को आरक्षण सीटों के परिसीमन के बाद प्रावधान होगा। इस परिसीमन कानून की पहली जनगणना के आंकड़ों के प्रकाशन के बाद ही इसका प्रभाव दिखाई देगा। आरक्षण 15 सालों के लिए होगा और इसके बाद संसद की इच्छा के अनुसार लागू रहेगा। इस शर्त के कारण, कांग्रेस ने सरकार के इस कदम को चुनावी जुमला करार दिया है।

क्या सच में यह एक चुनावी जुमला है?

सुप्रीम कोर्ट के हाल के फैसलों के बावजूद, केंद्र सरकार ने इस प्रावधान को न्यायिक दखल रोकने की मंशा से किया है। 2022 और इस साल भी जिन राज्यों में स्थानीय निकाय चुनाव हुए हैं, वहां ओबीसी आरक्षण लागू होने से पहले सुप्रीम कोर्ट ने एक कमेटी के जरिये संबंधित जाति के सर्वे को अनिवार्य कर दिया था। जिन राज्यों ने ऐसा नहीं किया, वहां के चुनाव रद्द कर दिए और दोबारा से सर्वेक्षण कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर आरक्षण तय होने के बाद ही चुनाव की अनुमति दी गई। महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश आदि राज्यों ने इस स्थिति का सामना किया। इस संदर्भ में, मोदी सरकार यदि लोकसभा और विधानसभा सीटों पर बिना परिसीमन के इस तरह का बड़ा आरक्षण देती, तो निश्चित रूप से इसे कोर्ट में चुनौती मिलती और कोर्ट के पुराने रुख को देखते हुए इसका लागू होना मुश्किल था।

जनगणना की प्रक्रिया

देश में 2021 में जनगणना होनी थी, लेकिन कोविड के कारण इसे स्थगित कर दिया गया। माना जा रहा है कि 2024 के चुनाव के बाद ही जनगणना का कार्य शुरू होगा, और पूरे देश में इसकी प्रक्रिया लंबी चलती है। आंकड़ों के प्रकाशन में भी समय लगता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे में परिसीमन का कार्य 2026 के बाद ही हो पाएगा, और इसके बाद होने वाले विधानसभा चुनावों में इसे लागू किया जा सकता है।

परिसीमन के बाद क्या होगा?

चुनाव आयोग तय करेगा कि कौन सी सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। ऐसा लॉटरी से या महिला मतदाताओं की संख्या के आधार पर हो सकता है। चूंकि हर सीट पर पुरुष और महिलाएं करीब-करीब बराबर ही होती हैं, इसलिए चयन लॉटरी से होने की उम्मीद ज्यादा है। परिसीमन के पहले जो सीटें आरक्षित होंगी, वह बाद में अनारक्षित हो जाएंगी, और आरक्षित सीटें हर बार बदलेंगी।

इस प्रकार, महिला आरक्षण विधेयक के महत्वपूर्ण प्रावधानों की व्यापक जानकारी हमें समझ में आई। इसके प्रावधानों के साथ, सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि महिलाएं लोकतंत्र के मूल तत्व में भी भागीदारी कर सकें।

By Vijay Srivastava