World Organ Donation Day : अगले जन्म में अपाहिज के डर में नहीं हो रहे अंगदान, PGI ने किया जागरूक

World Organ Donation Day : अगले जन्म में अपाहिज के डर में नहीं हो रहे अंगदान, PGI ने किया जागरूक

Superstition(अंधविश्वास)

World Organ Donation day : इस जीवन में अंगदान कर देने से अगले जन्म में अपाहिज होने का डर दिखाता है, लेकिन यह अंधविश्वास सिर्फ एक मिथक है। यह भ्रम लोगों को अंगदान से दूर खड़ा करता है।इस जन्म में अंगदान कर देंगे तो अगले जन्म में वह अंग दानदाता के पास नहीं होगा। अंगदान की राह में यही अंधविश्वास सबसे बड़ी बाधा है। इसलिए हमें इस अंधविश्वास पर काबू पाना होगा।

भारत में लिवर रोगों का आक्रमण

भारत में प्रतिवर्ष लगभग 2 लाख मरीज़ों की लिवर फेल्योर या लिवर कैंसर से मृत्यु हो जाती है, जिनमें से लगभग 10 – 15 फीसदी को समय पर लिवर प्रत्यारोपण से बचाया जा सकता था। इस विकर्ण को रोकने के लिए अंगदान एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।

जागरूकता का महत्व

विश्व अंगदान दिवस के अवसर पर, संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान में विशेषज्ञों ने लोगों को अंगदान के महत्व के बारे में जागरूक किया। यह कदम लेकर हम समाज में जागरूकता फैलाने का संकल्प लेते हैं। विश्व अंगदान दिवस पर संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान में रविवार को विशेषज्ञों ने लोगों को अंगदान के लिए जागरुक किया।

Awareness for Argan Donation

PGI के नेफ्रोलॉजी विभाग के प्रमुख प्रोफेसर नारायण प्रसाद और स्टेट आर्गन ट्रांसप्लांट सोसाइटी के संयुक्त निदेशक एवं अस्पताल प्रशासन विभाग के प्रमुख प्रोफेसर राजेश हर्षवर्धन ने बताया कि अंधविश्वास की वजह से ब्रेनडेड होने के बावजूद करीब 20 फीसदी मृतकों के परिवारजन अंगदान नहीं करते हैं। हमें इस मिथक को दूर करके अंगदान के महत्व को समझाना होगा।

जीवन का अनमोल उपहार

जीवित रहते हुए भी लोगों के पास अंगों को दान करने का विकल्प होता है, लेकिन यह अंधविश्वास उन्हें इस महत्वपूर्ण कदम से दूर करता है। हमें इस सोच को बदलकर समाज में जागरूकता पैदा करनी चाहिए।

अंगदान: जीवन और मौत का संवाद

पूर्व ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटर पुष्पा सिंह विभाग के पूर्व प्रमुख प्रोफेसर अमित गुप्ता को एसजीपीजीआई के निदेशक प्रो. आरके धीमन ने सम्मानित किया। जागरूकता कार्यक्रम में प्रो अनुपमा कौल, प्रोफेसर धर्मेंद्र भदोरिया, प्रोफेसर रवि शंकर कुशवाहा, प्रोफ़ेसर मानस रंजन पटेल, मेडिकल सोशल सर्विस ऑफिसर एवं ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटर विजय सोनकर, वरिष्ठ सहायक संतोष वर्मा, वरिष्ठ तकनीकी अधिकारी महेश कुमार] डॉ नीलमणि तिवारी उपस्थित रहे।

अंगदान से जुड़े मिथक

अंगदान को घेरे गए मिथकों ने लोगों के दिलों और दिमाग़ों में डर डाल दिया है। यह आवश्यक है कि हम इन मिथकों को दूर करके जीवन और मौत के इस महत्वपूर्ण संवाद में अंगदान के महत्व को समझें। अंगदान एक महत्वपूर्ण कदम है जो हमें जीवन और मौत के बीच संवाद में जोड़ता है। अंधविश्वासों को दूर करके, हम समाज में जागरूकता फैलाकर अंगदान को एक मानवता की सेवा के रूप में देख सकते हैं।

By Vijay Srivastava