अब दिन और रात के लिए देना होगा अलग-अलग बिजली दर, विद्युत उपभोक्ता परिषद ने बताया तुगलकी फैसला, देशभर में आंदोलन की तैयारी

अब दिन और रात के लिए देना होगा अलग-अलग बिजली दर, विद्युत उपभोक्ता परिषद ने बताया तुगलकी फैसला, देशभर में आंदोलन की तैयारी

विद्युत उपभोक्ता परिषद ने दिन और रात के लिए अलग-अलग बिजली दरों का विरोध करते हुए देशभर में आंदोलन की तैयारी शुरू कर दी है। परिषद ने इसे तुगलकी फैसला बताया है।

केंद्र सरकार द्वारा दिन और रात के लिए अलग-अलग बिजली दर लागू करने के निर्णय का विरोध आरंभ हो गया है। विद्युत उपभोक्ता परिषद ने इसे तुगलकी फरमान बताते हुए विरोध शुरू किया है। देश के अन्य विद्युत उपभोक्ता संगठनों ने एकत्रित होकर राष्ट्रीय नियामक आयोग से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक याचिका दायर करने की तैयारी शुरू की है।

केंद्र सरकार ने विद्युत उपभोक्ता अधिकार नियम 2020 में संशोधन करके बिजली टैरिफ प्रणाली में दो बदलाव पेश किए हैं। इसमें दिन और रात की बिजली दर में अंतर होगा। यह कानून 1 अप्रैल 2025 से लागू करने की तैयारी की जा रही है। इससे दिन में 10 से 20 प्रतिशत सस्ती और रात में 10 से 20 प्रतिशत महंगी बिजली दी जाएगी।

उपभोक्ता संगठनों ने उपभोक्ता टैरिफ में अलगाव की मांग रखी, राष्ट्रीय स्तर पर आवाज उठाने का निर्णय

उत्तर प्रदेश में विद्युत नियामक आयोग ने घरेलू और उद्योगों के लिए अलग-अलग टैरिफ लागू किया है। विद्युत उपभोक्ता संगठनों की राष्ट्रीय समन्वय समिति के अध्यक्ष और राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि घरेलू उपभोक्ता दिन में 70 प्रतिशत और रात में 30 प्रतिशत विद्युत का उपभोग करते हैं। इस कानून के माध्यम से पांच रुपये का फायदा दिखाने की तैयारी हो रही है।

वर्मा ने बताया कि इस मुद्दे पर केंद्रीय ऊर्जा सचिव आलोक कुमार से बातचीत की गई है। उनका कहना है कि यह एक राष्ट्रीय नीति है और ऊर्जा सचिव को बताया गया है कि कोई भी ऐसी नीति लागू नहीं की जाएगी जो उपभोक्ताओं को नुकसान पहुंचाए।

उपभोक्ता संगठनों की एकजुटता

जब संशोधित कानून की जानकारी मिली, तो उपभोक्ता संगठनों ने एकजुटता बढ़ाने का फैसला किया है। शनिवार को राष्ट्रीय समन्वय समिति के अध्यक्ष अवधेश वर्मा ने विभिन्न राज्यों के संगठनों के साथ वर्चुअल बैठक की। इस बैठक में तय हुआ है कि सभी राज्यों के उपभोक्ता परिषदें अपने नियामक आयोग में याचिका दायर करेंगी। जरूरत पड़ी तो सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका दायर की जाएगी।

इस संघर्ष के लिए उपभोक्ता संगठन तैयार हैं। वे नियामक आयोग से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक जाने के लिए तैयार हैं। उपभोक्ता संगठनों ने इसे तुगलकी फैसला बताया है और उनका मानना है कि इससे विद्युत उपभोक्ताओं को नुकसान होगा।

सरकार का पक्ष

केंद्रीय सरकार के मुताबिक़ यह फैसला उपभोक्ताओं को सस्ती बिजली का लाभ प्रदान करने के लिए लिया गया है। सरकार इससे यह उम्मीद कर रही है कि रात की बिजली की महंगाई उपभोक्ताओं को बाहर निकालेगी और उचित समय पर उपभोक्ताओं को बिजली प्रदान करने में मदद करेगी। उपभोक्ता परिषद के खिलाफ उनका कहना है कि इससे किसानों, गरीबों और गैर-अधिकारियों को बिजली की उपलब्धता में सुधार होगा। इसके अलावा, रात में बिजली की महंगाई को कम करके यातायात और औद्योगिक गतिविधियों को भी प्रोत्साहित किया जा सकेगा।

दिन और रात के लिए अलग-अलग बिजली दरों पर उपभोक्ता परिषद का विरोध केवल शुरुआत है। इस मामले में दोनों पक्षों के आरोप-प्रत्यारोप होने की संभावना है। उपभोक्ता संगठनों का मानना है कि यह फैसला उपभोक्ताओं को नुकसान पहुंचाएगा और वे इसे लागू नहीं होने देंगे। सरकार का दावा है कि यह फैसला उपभोक्ताओं को सस्ती बिजली प्रदान करेगा और उपभोक्ताओं को उचित समय पर बिजली देने में मदद करेगा। अगर मामला सुप्रीम कोर्ट तक जाता है, तो उसके फैसले का मान्यता प्राप्त करना होगा। इससे पहले उपभोक्ताओं और सरकार के बीच संवाद और समझौता हो सकता है जिससे इस मुद्दे का समाधान संभव हो सके।

By Vijay Srivastava